व्यंग्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
व्यंग्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 8 दिसंबर 2019

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना.. लघुकथा





बच्चों के स्कूल की छुट्टियां अभी नहीं हुई थी.पतिदेव को अपने खास दोस्त के रिश्तेदार की शादी में जाना था.यूँ कह लीजिए बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना. सभी बस छुट्टियों का इंतजार कर रहे थे. परंतु शादी एक सप्ताह पहले की तय थी. पति जानता था कि घर में पता चला तो पत्नी जाने नहीं देगी.उन्होंने युक्ति लगाई. उस दिन आधी रात को शराब के नशे में चूर हो कर घर आए ताकि शराब पीकर आने पर पत्नी से झगड़ा हो और  युक्ति काम कर गई. घर में  झगड़ा हुआ पति देव अपना बैग पैक करके घर से निकल गए.

सुधा सिंह ✍️

(# 100 शब्दों की कहानी)


सोमवार, 1 अप्रैल 2019

रीढ़ की हड्डी.. लघुकथा


  एक दिन नटवरलाल जी चलते - चलते दफ्तर में अचानक से गिर पड़े, तो दो चार क्लर्क उठाकर उन्हें अस्पताल ले गए. डॉक्टर ने जाँच करने के बाद कहा कि इनकी रीढ़ की हड्डी कमजोर हो गई है, प्रतिदिन तन कर चलने की कसरत करेंगे तो रीढ़ की हड्डी फिर से ठीक हो जाएगी. कहीं ये ज्यादा झुके- झुके तो काम नहीं करते ?

 तभी अचानक पास ही खड़ा उनका एक सह कर्मचारी दूसरे कर्मचारियों की ओर देखते हुए बोल पड़ा, "डॉक्टर साहब, काश यह गुण हममें भी होता.. आज हम भी इनके जैसे बड़े पद पर बैठे होते.
डॉक्टर साहब अवाक् थे.

सुधा सिंह 👩‍💻

(100 शब्दों की कहानी)

आनंद लीजिए 'रात की थाली ' का भी

वह पीला बैग

"भाभी यह बैग कितना अच्छा है!! कितने में मिला?" नित्या की कामवाली मंगलाबाई ने सोफे पर पड़े हुए बैग की तरफ लालचाई नजरों से इशार...