ससुराल में सभी बड़ों के आगे माथे पर पल्ला रखने का रिवाज था. यदा - कदा सिर से पल्ला खिसकने पर सास टोक देती। कहती, "देखो बहू, हमारे सामने भले ही सिर न ढको, पर पापाजी के सामने जरूर ढक लिया करो।
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घर की रसोई में ही छोटा- सा मंदिर था।एक दिन सुबह नहा - धोकर ससुर जी रसोई घर में पूजा करने आये। उन्हें देखते ही गैस पर रोटी सेंकते हुए बहू ने सिर पर झट से पल्ला रख लिया। ससुर जी तमतमा गए। बोले "अभी कुछ उल्टा- सीधा हो गया तो दुनिया वाले कहेंगे कि बहू को जलाकर मार दिया।"
उस दिन उन्होंने बहू को गलत तो ठहरा दिया पर कभी उससे यह नहीं कहा कि सिर पर पल्ला न रखा करे।
स्व लिखित :
सुधा सिंह व्याघ्र 📝
(100 शब्दों की कहानी)


