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शुक्रवार, 29 मई 2020

कौन गलत औऱ कौन सही

  ससुराल में सभी बड़ों के आगे माथे पर पल्ला रखने का रिवाज था.  यदा - कदा सिर से पल्ला खिसकने पर सास टोक देती। कहती, "देखो बहू,  हमारे सामने भले ही सिर न ढको, पर पापाजी के सामने जरूर ढक लिया करो।


घर की रसोई में ही छोटा- सा मंदिर था।एक दिन सुबह नहा - धोकर ससुर जी रसोई घर में पूजा करने आये। उन्हें देखते ही गैस पर रोटी सेंकते हुए बहू ने सिर पर झट से पल्ला रख लिया। ससुर जी तमतमा गए। बोले "अभी कुछ उल्टा- सीधा हो गया तो दुनिया वाले कहेंगे कि बहू को जलाकर मार दिया।"
उस दिन उन्होंने बहू को गलत तो ठहरा दिया पर कभी उससे यह नहीं कहा कि सिर पर पल्ला न रखा करे।
स्व लिखित :

सुधा सिंह व्याघ्र 📝

(100 शब्दों की कहानी)


रविवार, 14 अप्रैल 2019

वाई-फाई


वाई-फाई खत्म हो गया था और कुछ तंगी भी चल रही थी. बेटे के बार - बार कहने पर भी जब माँ ने वाई-फाई  रीचार्ज नहीं करवाया. तो माँ से उनके मोबाइल का हॉटस्पॉट मांगने लगा.माँ ने सोचा पूरा दिन पबजी खेलता है, इसी बहाने कुछ दिन तो रात में जल्दी सो जाया करेगा इसलिए माँ ने जब हॉटस्पॉट देने से भी मना कर दिया, तो बेटा तमतमाकर बोला, "भाड़ में जाओ."
उस दिन मां बिलख - बिलख कर रोई.
बच्चों को सभी सुख-सुविधाएँ आसानी से मुहैया करा देने का क्या यही परिणाम होता है??

##(100 शब्दों की कहानी)##

सोमवार, 1 अप्रैल 2019

रीढ़ की हड्डी.. लघुकथा


  एक दिन नटवरलाल जी चलते - चलते दफ्तर में अचानक से गिर पड़े, तो दो चार क्लर्क उठाकर उन्हें अस्पताल ले गए. डॉक्टर ने जाँच करने के बाद कहा कि इनकी रीढ़ की हड्डी कमजोर हो गई है, प्रतिदिन तन कर चलने की कसरत करेंगे तो रीढ़ की हड्डी फिर से ठीक हो जाएगी. कहीं ये ज्यादा झुके- झुके तो काम नहीं करते ?

 तभी अचानक पास ही खड़ा उनका एक सह कर्मचारी दूसरे कर्मचारियों की ओर देखते हुए बोल पड़ा, "डॉक्टर साहब, काश यह गुण हममें भी होता.. आज हम भी इनके जैसे बड़े पद पर बैठे होते.
डॉक्टर साहब अवाक् थे.

सुधा सिंह 👩‍💻

(100 शब्दों की कहानी)

आनंद लीजिए 'रात की थाली ' का भी

वह पीला बैग

"भाभी यह बैग कितना अच्छा है!! कितने में मिला?" नित्या की कामवाली मंगलाबाई ने सोफे पर पड़े हुए बैग की तरफ लालचाई नजरों से इशार...